Normal Days Song Lyrics (Khushali Kumar) – Download Free Lyrics PDF & Ringtone Here

Normal Days Lyrics by Khushali Kumar is the latest song with music given by Jigar Panchal and Chirag Panchal. Normal days song lyrics are written by Khushali Kumar and video is directed by Mohan S Vairaag. Here One can find Normal Days Song Lyrics Pdf, Punjabi Normal Days Song Lyrics in Punjabi, Hindi & English, Normal Days Song Ringtone, Punjabi Normal Days Song Download, Normal Days Song Mp3 Download. Get Normal Days song lyrics here Below.

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Normal Days Song Information:

Singer Khushali Kumar
Lyricist Khushali Kumar
Music Jigar Panchal and Chirag Panchal
Director Mohan S Vairaag
Composer Jigar Panchal, Chirag Panchal

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Normal Days Song Lyrics By Khushali Kumar:

Jab maa kehti thi woh bhi kya din the
Peechhe jaane ki zaroorat kya hai
Aksar main yeh sochti thi sunkar
Kuchh dinon se halaat normal nahi hain
To mann apne aap bhaag jaata hai
Un dinon ki oar jab sab normal tha

Ek cup chai aur glucose ke biscuit khakar
Kaam par nikalna
Maa ka peechhe peechhe bhaagkar tiffin pakdana
Arre lunch to leti ja sath

Raste mein logon ko
Traffic challan dene se bachne ke liye
Inspector se ladta dekh lagta tha
Police public se kyun jhagadti hai
Main badal gayi ya mera nazariya
Par aaj police kamaal lagti hai

Kahin se kuchh bhi kehte huye dost
Kya kamaal lagte the
Lagataar ek hi baat par ghanton baatein
Ab lagta hai woh time waste nahi kiya
Uss connection ka maza hi kuchh aur tha
Jinse kabhi hello bhi nahi huyi
Aaj unka chehra bhi jaana sa lagta hai
Jinke paas ghar nahi hai
Unki aankhon ka sapna bhi apna sa lagta hai

Saayad yeh kudrat humse kuchh keh rahi hai
Ab thoda ruk kar sochne ko keh rahi hai
Ab tak jo hua us’se kuchh seekhne ka
Ishaara kar rahi hai
Ab aane wale samay mein
Hum sabko hath pakadkar chalna hoga
Maa shayad yehi keh rahi hai

Ab ehmiyat pata chali
Ki normal se badhkar aur kuchh nahi hai
Meri maa ka pehle ke dinon sarahna
Ab samajh aaya ki kyun zaroori hai
Taaki jab sab normal ho jaaye
Hum har uss chez ko jiyein
Jo hamare munh par hansi aur
Doosron ke munh par khushi laate hai
Uski khushi meri hansi
Na tera mera na koyi faasla
Maa sabki sach kehti hai

Sabki aankhon mein sapne hain
Unhein phir se sach karenge
Bas ek baar phir waapas ho jaayein normal days

Normal Days Song Lyrics in Hindi By Khushali Kumar:

जब मा केहती थी वो भी क्या दिन द
पीछे जान के जररौत क्या है
अकार मुख्य याह सोची थी सनकर
कुच्छ दिनन से हलत सामान्य न होई
मन्न अपनों को आप जग जाना है
अन दिनन के ओर जाब सब सामान्य थ

एक कप चाय अर ग्लूकोज के बिस्किट खाकर
काम् पार निकलना
मा का पीचे पीछे भगाकर टिफिन पकडना
अर लंच को लेटी जा सथ

Raste mein logon ko
ट्रैफिक चालान dene se bachne ke liye
इंस्पेक्टर से लडता देख लगत थ
पुलिस जनता से कउन झगड़ति हे
मुख्य बैडल गाइ य मेरा नजारिया
पार आज पुलिस कमाल की लग रही है

कहिन से कुच्छ भी कहे होए दोस्त
क्या कमल लगते हैं
लगतार एक ही बाट बराबर घनटन बाटे
अब लगत है वोह समय बर्बाद न कीया
Uss कनेक्शन ka maza hi kuchh aur tha
जिन कभि हेलो भई न होई
अज अनका चेहरा भी जाना सा लगत है
जिन्के पस घर न होई
उंकी आंखें का सपना भी अपना सा लग रहा है

सय्यद ये कुदरत हम कुच्छ कहे ही है
आब थोडा रूक कर सोचन को भी राही है
अब तक जो हमसे हम नहीं मांगते हैं
इशरा ​​कर रह है
आब एने वले सम मे
हम सबको पाखड़ चक्ना हो गया
मां शायद येही के राही है

अब एहमियत पाट चलि
के नॉर्मल से बडखर और कुच्छ नहीं है
मेरी माँ के पीले के दिन सरहना
आब समज आ कयूँ जियोरोरी है
ताकी जब सब नॉर्मल हो जाए
हम हर हम चेज को जीयने
जो हमरे मुन बराबर हमसी अउर
दोसरो के मुन पार खुसी लते है
उस्की खुसी मेरी हंसी
ना तेरा मेरा ना कोय फासला
मां सबकी संग की है

सबकी आंखें में सपन हैं
उनहिं फिर से से करगें
बस इक बरे फिर वापस हो जाए सामान्य दिन

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Normal Days Song Lyrics in Punjabi By Khushali Kumar:

ਜਬ ਮੈ ਕੇਤੀ ਤੇ ਵੋ ਭੀ ਕਿਆ ਦਿਨ॥
ਪੀਛੈ ਜਾਨ ਕੀ ਜ਼ਾਰੂਤ ਕਿਆ ਹੈ
ਅਕਸਰ ਮੁਖ ਇਹ ਸੋਚਤਿ ਥਿ ਸੰਕਰ॥
ਕੁਛ ਦਿਨੋਂ ਸੇ ਹਲਤ ਸਧਾਰਣ ਨਹੀ
ਤੋ ਮਨ ਆਪੇ ਆਪ ਭਾਗ ਜਾਤਾ ਹੈ
ਅਨ ਦਿਨੋਂ ਕੀ ਓਰ ਜਬ ਸਬ ਸਾਧਾਰਾ॥

ਏਕ ਕੱਪ ਚਾਏ ਅਤੇ ਗਲੂਕੋਜ਼ ਕੇ ਬਿਸਕੁਟ ਖਾਕਰ
ਕਾਮ ਪਾਰ ਨਿਕਲਣਾ
ਮਾਂ ਕਾ ਪੇਚੈ ਪੇਚੈ ਭਾਗਕਰ ਤਫਿਨ ਪਕਦਾਨਾ
ਖਾਣਾ ਖਾਣਾ

ਰਸਤੇ ਮੈਂ ਲਾਗੋਂ ਕੋ
ਟ੍ਰੈਫਿਕ ਚਲਾਨ dene se bachne ke liye
ਇੰਸਪੈਕਟਰ ਸੇ ਲਾਡਾ ਵੇਖ ਲਗੇ ਥ
ਪੁਲਿਸ ਪਬਲਿਕ ਸੇ ਕਯੂਨ ਝਗੜਤੀ ਹੈ
ਮੁਖ ਬਾਦਲ ਗਯਾ ਮੇਰਾ ਨਜ਼ਾਰੀਆ
ਪਰ ਅੱਜ ਪੁਲਿਸ ਕਮਾਲ ਲਗਦੀ ਹੈ

ਕਹਿਨ ਸੇ ਕੁਛ ਭੀ ਕਹਤੇ ਹੋਇ ਦੁਸਟ॥
ਕਿਆ ਕਮਾਲ ਲਗੈ
ਲਗਤਾਰ ਏਕ ਹੀ ਬਾਤ ਪਾਰ ਘੈਂਟੋਂ ਬਾਟੇਂ
ਅਬ ਲਗਤਾ ਹੈ ਵੋਹ ਸਮਾਂ ਵਿਅਰਥ ਨਹੀਂ ਕੀਆ
ਓਸ ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ ਕਾ ਮਜ਼ਾ ਹੀ ਕੁਛ ਤੇਰਾ
ਜਿਨਸ ਕਭੀ ਹੈਲੋ ਭੀ ਨਹੀਂ ਹੋਇ॥
ਅਜ ਅਨਕਾ ਚਹਿਰਾ ਭੀ ਜਾਨ ਸਾ ਲਗਤਾ ਹੈ
ਜਿਨਕੇ ਪਾਸ ਘਰ ਨਹੀ ਹੈ
ਉਂਕੀ ਆਂਖੋਂ ਕਾ ਸਪਨਾ ਭੀ ਅਪਣਾ ਸ ਲਗਤਾ ਹੈ

ਸਯਦ ਯੇ ਕੁਦਰਤ ਹਮਸੇ ਕੁਛ ਕਹੀ ਰਹੀ
ਅਬ ਥੋਡਾ ਰੁਕ ਕਰ ਸੋਚਨੇ ਕੋ ਕੇ ਰਹਿ ਰਹੀ ਹੈ
ਅਬ ਤਕ ਜੋ ਹੂ ਸਾਡੇ ਲਈ ਕੁਛ ਸੀਖਨੇ ਕਾ
ਇਸ਼ਾਰਾ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ
ਅਬ ਅਨੇ ਵਲੇ ਸਮੈ ਮੈਂ
ਹਮ ਸਬਕੋ ਹੈ ਪੱਕੜਕਰ ਚਲਨਾ ਹੋਗਾ
ਮਾ ਸ਼ਾਦ ਹੈ

ਅਬ ਅਹਿਮੀਅਤ ਪਟਾ ਚਾਲੀ
ਕੀ ਆਮ ਸੇ ਬਧਕਰ kਰ ਕੁਛ ਨਹੀ ਹੈ
ਮੇਰੀ ਮਾਂ ਕਾ ਪੇਹਲੇ ਦੇ ਦਿਨ ਸਰਨਾ
ਅਬ ਸਮਾਝ ਆਯਾ ਕੀ ਕਯੂੰ ਜ਼ੂਰੂਰੀ ਹੈ
ਤਾਕੀ ਜਬ ਸਭ ਆਮ ਹੋ ਜਾਏ
ਹਮ ਹਰ ਯੂਸ ਚੇਜ਼ ਕੋ ਜੀਯੀਂ
ਜੋ ਹਮਾਰੇ ਮੁਨ੍ਹ ਪਾਰ ਹੰਸੀ .ਰ
ਦੂਸਰੋਂ ਕੇ ਮੁੰਡ ਪਾਰ ਖੁਸ਼ੀ ਲੇਟ ਹੈ
ਉਸਕੀ ਖੁਸ਼ੀ ਮੇਰੀ ਹੰਸੀ
ਨਾ ਤੇਰਾ ਮੇਰਾ ਨਾ ਕੋਇ ਫਸਲਾ
ਮਾਂ ਸਬਕੀ ਸਾਚ ਕੀਤੀ ਹੈ

ਸਬਕੀ ਆਂਖੋਂ ਮੈਂ ਸਪਨੇ ਹਾਂ
ਅਨਹਿਂ ਫਿਰ ਸੇ ਸਚ ਕਰੇਗੇ
ਆਮ ਇਕ ਦਿਨ

pun

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